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शनिवार, अगस्त 07, 2010

राजधानी एक्सप्रेस के यात्रियों को मिलती है गंदी चादर

अच्छी सेवा नहीं देने के बाद भी कोच अटेंडेंट मांगते हैं टिप
संजय
नागपुर।
नागपुर से गुजरने वाली नई दिल्ली-बिलासपुर राजधानी एक्सपे्रस में सफर करने वाले यात्री खिन्न हंै। उन्हें उपलब्ध सुविधाएं ठीक से नहीं प्रदान की जा रही हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार नई दिल्ली से बिलासपुर जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस में यात्रियों को मिलने वाली बिछाने की चादर इन दिनों गंदी मिल रही है। कई यात्रियों को तो बिना इस्तरी किए हुए ही चादरें दी जा रही हैं। कुछ चादरों पर सब्जी के दाग भी नजर आते हैं। वहीं नई दिल्ली से चेन्नई तक जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस की सुविधा थोड़ी-सी ठीक है।
नई दिल्ली-बिलासपुर राजधानी एक्सप्रेस में सफर कर आए डा. सुरजीत के. सिंह ने बताया इस टे्रन के वेंडर, यात्रियों से टिप भी मांगते हैं। डा. सिंह ने बताया कि वे नई दिल्ली से नागपुर तक बुधवार को नई दिल्ली -बिलासपुर राजधानी एक्सप्रेस से आए। उन्हें बिछाने और ओढऩे के लिए जो भी चीजें उपलब्ध कराई गईं, वे गंदी थीं। इतना ही नहीं तकिये के खोल धुले हुए नहीं थे। उस पर यात्रियों के बाल लगे थे। इस तरह की शिकायत कुछ अन्य यात्रियों की भी थी। जब कोच अटेंडेंट से इसे बदलने के लिए कहा गया तो वे आनाकानी करने लगे। शिकायत पुस्तिका मांगने पर वे नहीं दे रहे थे। काफी हो-हल्ला करने पर टीटीई शिकायत पुस्तिका लेकर आया तब शिकायत लिखी। शिकायत पुस्तिका के आधे पेज भरे हुए थे। इससे लगता है कि राजधानी एक्सप्रेस में अव्यवस्था का कितना आलम है। इतनी शिकायत होने के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधरी है। महंगे टिकट खरीद कर सफर करने वाले यात्रियों के साथ जब ऐसा व्यवहार है तो सामान्य ट्रेनों के वातानुकूलित डिब्बे में सफर करने वाले यात्रियों का क्या हाल होगा, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।

गुरुवार, फ़रवरी 25, 2010

रेल बजट भाषण के दौरान एक ट्रेन पटरी से उतरी



संजय स्वदेश
नागपुर.

जिस समय रेलमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा में लोकलुभावनी रेल बजट प्रस्तुत करना शुरू किया। उसके ठीक कुछ दे बाद करीब 12:15 बजे हवाड़ा से कुर्ला जाने वाली ट्रेन नंबर 8030 शालिमार एक्सप्रेस गोंदिया जिले के सालेकसा तहसील के पास नवाटोला रेलवे गेट के नजदीक पटरी से उतर गई। खबर है कि इंजन के तीन पहीये ही पटरी से उतरे। इसलिए कोई यात्री अकाल काल के गाल में नहीं समा पाया। हर चैनल पर रेल बजट ही छाया रहा। खबर कहीं नहीं आई। esh kai train ghanto let huwee. मंडल रेलवे मंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना की सूचना पाकर रेलवे के वरिष्ठकर्मी घटना स्थल पर पहुंच गए। संयोग अच्छा रहा कि केवल इंजन ही पटरी के तीन पहीये ही पटरी से उतरे, नहीं तो दुर्घटना बड़ी हो जाती। लोग हताहत होते। रेलवे बजट पूरी तरह से इस घटना पर केंद्रीत हो जाता। जो भी हो। रेलवे की अनेक बड़ी दुर्घटनाओं की तुलना में यह घटना छोटी है। पर है गंभीर। रेलमंत्री ने बजट भाषण में ट्रेनों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त बटालियन बनाने की बात कर प्रसंसा तो बटोरी। पर आदि दिन होने वाली ट्रेनेां में लूटपाट को रोकने और सबसे महत्वूपर्ण रेलवे दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किसी तरह की कारगर नीति की बात नहीं की। हालांकि यह उल्लेख जरूर किया कि रेलवे में उन्नत तकनीक उपयोग करने के लिए आईआईटी के साथ करार किया गया है।
पहले ही रेल दुर्घटनाओं के मामलों में रेलमंत्री यह कहकर हाथ खड़ी करती दिखी कि दुर्घटनाओं पर अपना नियंत्रण नहीं है। संभवत: यहीं कारण हो कि रेलमंत्री ने दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किस तरह की कारगर नीति के लिए चिंतन मनन करने की कोशिश नहीं की। लेटलतीफी और अनेक अव्यवस्थाओं की शिकार रेलयात्री अभी भी अपनी सुरक्षा राम भरोसे छोड़ कर चल रहे हैं।
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