सोमवार, अप्रैल 05, 2010

बड़ी होटलों में लड़कियों की आपूर्ति!

जुआरियों के लिए देर रात तक चलता है कैबरे
विशेष प्रतिनिधि
नागपुर।
नागपुर की बड़ी होटलों में आजकल वह सब कुछ हो रहा है जो कानूनन जुर्म है। नागपुर की होटल तुली इंटरनैशनल में 12 बड़े जुआरियों के पकड़े जाने और उनके पास से 14 लाख से अधिक रकम बरामद किए जाने की घटना के बाद से बड़ी होटलों में चलने वाले काले कारनामों का चि_ïा खुलने लगा है। सूत्रों ने बताया कि अकेला होटल तुली इंटरनैशनल ही नहीं है जहां जुआ-सट्टïा चल रहा है, नगर में दर्जनभर ऐसे बड़े होटल हैं जहां बड़ा जुआ तो चलता ही है, जुआरियों की हवस को बुझाने के लिए लड़कियों की आपूर्ति भी की जाती है। यह लड़कियां रायपुर और मुंबई से बुलाई जा रही हैं। खासकर शनिवार की रात नगर की कई बड़ी होटलों में जुए और जिस्मफरोशी के अड्डïे सजते हैं और इनका कारोबार लाखों में है।
सूत्रों ने बताया कि नगर की बड़ी होटलों में चल रहे जुए के अड्डïों के साथ जिस्मफरोशी के अड्डïे भी तेजी से पनप रहे हैं। कुछ नामी लोग बड़े मुर्गों को पकड़ïकर जुआ भराते हैं। जुआ खेलने के बाद जुआरियों के लिए उसी होटल में एक से बढ़कर एक लड़कियों की आपूर्ति भी की जाती है। कई जुआरी तो इन्हीं लड़कियों के चक्कर में जुआ खेलने आते हैं। हालांकि इसके लिए लड़कियों की आपूर्ति करने वाले लोग लाखों की वसूली भी करते हैं। बड़ी होटलों के बंद कमरों में जिस्मफरोशी के अलावा देर रात तक कैबरे डांस भी चलता रहता है। राज्य के गृहमंत्री आर.आर. पाटिल ने बड़ा ढाढ़स कर राज्य में डांस बार तो बंद करा दिए लेकिन यही डांस बार अब शहरों की बड़ी होटलों के बंद कमरों में शुरू हो गए हैं। केवल जुआरियों के लिए नहीं बल्कि नगर के अन्य रइसों के लिए भी यहां लड़कियों व डांस गल्र्स का इंतजाम किया जाता है। सूत्रों ने बताया कि रात के समय यहां लड़कियां लाई जाती हैं और वे पूरी रात होटल में ही रहती हैं। शाम के समय लड़कियों को लाना इसलिए टाला जाता है कि किसी की नजर में न आ जाए। अधिकांश लड़कियां इन दिनों रायपुर से नागपुर लाई जा रही हैं। इसके बाद मुंबई की लड़कियों की भी कोई कमी नहीं है। बिना किसी लाइसेंस के बड़ी होटलों में धड़ल्ले से डांस बार या गजल-नृत्य के कार्यक्रम बंद कमरों में चल रहे हैं और इसमें लाखों की कमाई हो रही है। सूत्र बताते हैं कि नागपुर में लड़कियों के शौकीनों की कोई कमी नहीं है और अच्छी सुविधा उपलब्ध हो तो पैसा लुटाने वालों की भी कोई कमी नहीं है। लड़कियों की आपूर्ति करने वाले लोगों ने इस धंधे के साथ-साथ जुआघर भी शुरू कर होटल वालों के साथ-साथ स्वयं का धंधा भी बढ़ा लिया है।
बड़ी होटलों में चलने वाले इस प्रकार के अवैध व्यवसाय से होटल प्रबंधन भलीभांति अवगत है लेकिन वह मुंह पर पट्टïी बांधे रहता है। धंधे पर असर होने का खतरा जो रहता है। एक होटल के एक कमरे में दर्जनभर लोग एकसाथ घंटों रहने लगे और होटल प्रबंधन को भनक भी नहीं लगे ऐसा हो ही नहीं सकता। इसी कारण कई लोगों की मांग है कि किसी होटल में जुआ पकड़े जाने पर उस होटल के मालिक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाए।

क्या गडकरी के सपने का साकार कर पाएंगे मुनगंटीवार!

आज महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति विचित्र मोड़ पर खड़ी हुई है। सत्तारूढ़ कांग्रेस और राकांपा के बीच तालमेल का अभाव है। दोनों सत्तारूढ़ दल एक-दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और शिवसेना के बीच भी उतने मधुर संबंध अब नहीं रह गए हैं।
क्या नई जिम्मेदारी की नई चुनौती को एक सैनिक के रूप में स्वीकार कर सुधीर मुनगंटीवार अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के स्वप्न को साकार कर पाएंगे? यह सवाल आज हर किसी के जेहन में है और मुनगंटीवार के अब तक के कार्यों को देखकर तो यही लग रहा है कि इसका जवाब हां में ही आएगा।
नितिन गडकरी वर्ष 2014 को लक्ष्य बनाकर केंद्र की सत्ता में भाजपा की वापसी को लेकर लगातार आगे बढ़ रहे हैं और उनके इस लक्ष्य की पूर्ति में महाराष्ट्र की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगी। ऐसी स्थिति में गडकरी ने महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सुधीर मुनगंटीवार जैसे युवा और समझदार नेता पर डालकर निश्चित रूप से सराहनीय कार्य किया है। अब मुनगंटीवार के लिए यह अग्निपरीक्षा की घड़ी है। अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के विश्वास पर खरे उतरने तथा महाराष्ट्र में भाजपा को नंबर वन बनाने की कठिन चुनौती उनके सामने है। आज महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति विचित्र मोड़ पर खड़ी हुई है। सत्तारूढ़ कांग्रेस और राकांपा के बीच तालमेल का अभाव है। दोनों सत्तारूढ़ दल एक-दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और शिवसेना के बीच भी उतने मधुर संबंध अब नहीं रह गए हैं। हिन्दुत्व के मुद्दे पर दोनों भले ही एकजुट हों लेकिन अन्य कई मुद्दों पर भाजपा-शिवसेना के बीच खाई लगातार बढ़ती ही जा रही है। राज्य में रिपब्लिकन पार्टी कई धड़ों में बंट चुकी है। ऐसी विचित्र राजनीतिक स्थिति के बीच भाजपा को ताकतवर बनाने का जिम्मा मुनगंटीवार पर है और इसके लिए उन्हें कड़े कदम उठाने होंगे। मुनगंटीवार के पास जुझारुपन है, आत्मविश्वास है, राजनीति का लंबा अनुभव है और सबसे बड़ी बात उनके पास गडकरी का मार्गदर्शन है। इसी मार्गदर्शन को पाकर राज्य भाजपा को सही दिशा की ओर ले जाने का कार्य मुनगंटीवार को करना होगा। उनकी राह में कई कांटे आएंगे जिन्हें गडकरी जैसी दिलेरी से उन्हें पार करना पड़ेगा। 20 वर्षों से विधायक मुनगंटीवार पर राज्य भाजपा की बड़ी जिम्मेदारी गडकरी ने यूं ही नहीं सौंपी है। गडकरी को मुनगंटीवार पर विश्वास है और इस विश्वास पर खरे उतरने की चुनौती को मुनगंटीवार जरूर स्वीकार करेंगे।
भाजपा की सहयोगी शिवसेना राज्य में लगातार कमजोर होती जा रही है। विधानसभा में विपक्ष का नेता पद शिवसेना से छिनकर भाजपा की झोली में आ चुका है। गडकरी जब प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष थे तब उन्होंने शिवसेना के सामने भाजपा को कभी दबने नहीं दिया। गडकरी ने शिवसेना पर दबाव बनाकर उसके कोटे की सीटें लड़कर भाजपा के कोटे में लाईं। पूर्व नागपुर विधानसभा क्षेत्र इसका उदाहरण है जहां शिवसेना वर्षों से हारती रही जबकि भाजपा पहले ही झटके में विजयी रही। गडकरी जैसी ही कूटनीतिक चालें मुनगंटीवार को चलनी होंगी ताकि शिवसेना किसी भी मोड़ पर भाजपा पर हावी न होने पाए। चूंकि शिवसेना बार-बार अपना रंग बदलने में माहिर है, अत: शिवसेना की चातिर चालों से भाजपा की रक्षा की जिम्मेदारी भी मुनगंटीवार पर है। गडकरी का मार्गदर्शन हमेशा उनके साथ रहेगा। भाजपा को केंद्र की सत्ता दिलाने की गडकरी द्वारा शुरू की गई घुड़दौड़ में मुनगंटीवार को बराबरी का साथ देना होगा। इसमें जरा सी भी चूक भाजपा के लिए ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती है।

3 मौतों के बाद ही जागे अधिकारी

(0) बुधवारी में धड़ल्ले से जारी है नकली तेल का कारोबार
राजेश्वर मिश्र
नागपुर। अंंतत: अन्न व औषधि प्रशासन के लापरवाह और कामचोर अधिकारियों की नींद 3 व्यक्तियों की मौत और कई लोगों के बीमार होने के बाद ही खुली और उन्होंने नकली तेल बेचने के आरोप में सुनील किराना स्टोर्स के सुनील लालवानी के खिलाफ मामला दर्ज किया।
नकली तेल के कारोबार का यह मामला नया नहीं है। इतवारी, बुधवारी, मस्कासाथ इलाके में ऐसे कई शेर बैठे हैं जो धड़ल्ले से नकली तेल का कारोबार कर रहे हैं लेकिन हरे और लाल रंगों के कागज के टुकड़ों से दबे अधिकारियों की आंखें मिलावटी कारोबार करने वालों की करतूतों की ओर हमेशा बंद ही रहती हैं। इस बारे में कई बार खबरें प्रकाशित होने के बावजूद हाथ पर हाथ धरे बैठे अधिकारी अब जाकर जागे हैं जब तीन लोग हमेशा के लिए मौत की नींद में समा चुके हैं। इसके बावजूद यह नहीं लगता कि यह अधिकारी मिलावटखोरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करेंगे ही। इन अधिकारियों व मिलावटखोरों के पास बचने के कई रास्ते हैं। अधिकारी मिलावटी तेल के नमूने लेंगे। उन्हें जांच के लिए पुणे भेजेंगे। रिपोर्ट आने में महीनों लगेंगे। तब तक मिलावटखोर उस रिपोर्ट को बड़ी आसानी से बदल देगा।
बुधवारी में कदम-कदम पर खाद्य तेल में मिलावट होती हुई आसानी से देखी जा सकती है कि कागज के चंद टुकड़ों के कारण दबे यह अधिकारी जानबूझकर धृतराष्ट्र बने हुए हैं ताकि मिलावटखोर और अधिक कारनामे करें तथा गरीब जनता भले ही मर जाए लेकिन अधिकारियों की जेब गर्म होती रहे। तेल की मिलावट के इस बड़े कारोबार में कई बड़ी मछलियां फंसी हुई हैं जो गरीबों का खून चूसकर खुद के अलावा भ्रष्ट अधिकारियों का घर भर रही हैं। गरीब तड़प-तड़प कर मर रहा है लेकिन इसकी पर्वाह किसी को नहीं है। हादसे के बाद ही जागने की भारतीय अधिकारियों की परंपरा में एक और अध्याय जुड़ गया है लेकिन जिस परिवार ने अपने 3 लाड़लों को खोया है, उन पर क्या बीत रही होगी यह कोई नहीं जानता।

खाद्य तेल के हैं 1200 ब्रांड

(0) तेल बाजार में करोड़ों का नकली कारोबार
(0) खूब कमाई कर रहे हैं अधिकारी
विशेष प्रतिनिधि
नागपुर। जहरीले तेल से मौत का सिलसिला नगर में शुरू हो चुका है और अन्न व औषधि विभाग दिखावे की कार्रवाई कर एक छोटे मुर्गे पर कार्रवाई भी कर चुका है लेकिन बड़ी मछलियों को छूने की हिम्मत अधिकारियों की नहीं हो रही है। नागपुर के तेल बाजार खाद्य तेल घर बैठे पहुंचाने वाले रहस्मय टैंकरों का पर्दाफाश होने के बाद पता चला है कि नागपुर के तेल बाजार में खाद्य तेल के एक नहीं, दो नहीं बल्कि पूरे 1200 ब्रांड हैं और इनमें से अधिकांश नकली हैं। नागपुर के तेल बाजार में करोड़ों का नकली कारोबार चल रहा है और इस कारोबार को बढ़ावा देने वाले अन्न व औषधि विभाग के कुछ अधिकारी भी लाखों की कमाई में व्यस्त हैं। यही कारण है कि बड़ी मछलियों पर हाथ डालने से पहले उन्हें 10 बार सोचना पड़ रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नागपुर के तेल बाजार में 1200 से अधिक ब्रांड के तेल मौजूद हैं। लेबल कुकुरमुत्ते की तरह मिल जाते हैं और जितने भी नए कारोबारी इस धंधे में आ रहे हैं वे नए लेबल के साथ बाजार में उतरते हैं और ग्राहक सैकड़ों प्रकार के लेबलों के कारण भारी असमंजस में है। सूत्रों ने बताया कि अधिकांश लेबल धारक नकली कारोबार करते हैं। तेल एक ही होता है, बस लेबल अलग होता है। अकेले सोयाबीन तेल की नागपुर के बाजार में 700 से अधिक ब्रांड हैं। इन दिनों सोयाबीन तेल की खपत सबसे अधिक है जिसके कारण इसके कारोबार में कुकुरमुत्तों की तरह कारोबारी उग आए हैं। खाली तेल के टीन लाकर उन पर मनमाने ढंग से लेबल चस्पाए जाते हैं। मजे की बात यह है कि लेबल पर जो पता होता है वह पूरी तरह काल्पनिक होता है। इस प्रकार के लेबलों की आपूर्ति करने वालों ने भी अपनी दुकानें अलग से खोल ली हैं। तेल बाजार में खतरनाक खेल चल रहा है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है। जिन लोगों पर इसका ध्यान रखने की जिम्मेदारी है, वे चैन की बंसी बजा रहे हैं। न तो अन्न व औषधि प्रशासन विभाग इधर ध्यान दे रहा है और न ही तेल व्यापारियों का संगठन ध्यान दे रहा है। किसी के पास इस बात का जवाब नहीं है कि तेल बाजार में अगर 1200 से ज्यादा लेबल वाला माल है तो आखिर वह कहां का है और किसका है।
नकली माल वाले तो तेल बाजार में सक्रिय हैं ही, कई नामी ब्रांड वाले भी नकली लोगों को देखकर अपना रंग बदल चुके हैं। पिछले वर्ष एक नामी ब्रांड वाले तेल विक्रेता के पाउच में बदबूदार तेल मिलने की घटना से सनसनी फैल गई थी। इस तेल के पैकेट राज्य के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को भी भेंट किए गए थे। मुख्यमंत्री ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था लेकिन बाद में सबकुछ शांत हो गया। अधिकारियों, नेताओं द्वारा शह दिए जाने के कारण ही आज तेल बाजार में कई अपराधी तो घुस आए ही हैं, वर्षों से व्यापार करने वाले लोग भी अपने हाथ काले करने से नहीं डर रहे हैं। इस नकली कारोबार पर शीघ्र ही रोक नहीं लगाई गई तो आज 3 लोग ही मरे हैं, कल चलकर 300 लोग या 3000 लोग भी मर सकते हैं। वैसे भी घातक तेल के कारण कई लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार हो ही चुके हैं।

रविवार, अप्रैल 04, 2010

राजनीतिक विसंगतियों पर व्यंग्य बाण


लोहिया अध्ययन केंद्र नागपुर में आयोजन

राजनीतिक गलियारों में आईं विसंगतियों पर नागपुर me सुभाष मार्ग स्थित लोहिया अध्ययन केन्द्र के स्व.मधु लिमये स्मृति सभागृह में शनिवार को व्यंग्य के तीर चले। शहर के नामी व्यंग्यकारों जैसे डा. गोविंद प्रसाद उपाध्यय एवं टीकाराम साहू 'आजादÓ ने धनुर्धर की भूमिका निभाई। डा. गोविंद प्रसाद उपाध्याय ने स्वाइन फ्लू के बहाने बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों द्वारा मचाई गई लूट की खबर ली और सत्ता के लिए गठबंधन की राजनीति पर कटाक्ष किया।

डा.उपाध्याय ने 'सुअर सम्वादÓ एवं 'गांठ बिना गठबंधनÓ शीर्षक से व्यंग्य पाठ किया। टीकाराम साहू 'आजादÓ ने सदन में बजट के दौरान मूल चिंताओं से ध्यान हटाने के लिए कविताओं का सहारा लेने पर चुटकी ली। यही नहीं सदन में अभद्र आचरण पर व्यंग्य भी किया। श्री साहू ने 'कविता और बजटÓ एवं 'विधानसभा में अखाड़ाÓ शीर्षक से व्यंग्य पाठ किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष शिक्षाविद डा.ओमप्रकाश मिश्रा ने व्यंग्य की समालोचना करते हुए कहा कि अलग-अलग विचारों के बावजूद व्यंग्य विधा के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता क्योंकि सामाजिक जीवन में व्यंग्य के जैसी स्थिति बन गई है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए युवा कवि एवं पत्रकार उमेश यादव ने कहा कि सामाजिक विडम्बनाओं और जटिलताओं से जुड़े हुए लेखन में, चाहे वह काव्य हो या कथा साहित्य, व्यंग्य का स्वर मुखर होता है। लोहिया अध्ययन केन्द्र के सचिव हरीश अड्यालकर ने आभार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में डा.रामप्रकाश सक्सेना, पुष्पेन्द्र फाल्गुन, नंदकिशोर व्यास, माधवराव दादीलवार, अनिल मालोकर, ओमप्रकाश शिव, सुभाष तुलसीता, कृपण कुमार द्विवेदी, डा. कमलकिशोर गुप्ता, सुरेश हरडे, श्याम शेंडे, एम.के.कापसे, एस.जी. राजकुमार, ओ.पी.वर्मा, सर्जेराव गजपट, विश्वास सहारे सहित बड़ी संख्या में प्रबुध्द जन उपस्थित थे।

शनिवार, अप्रैल 03, 2010

मोबाइल कंपनियों ने निकाला कमाई का नया तरीका

मुफ्त नहीं रही मोबाइल की 'कस्टमर केयरÓ सुविधा
लंबे समय बाद यदि आप अपने मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी के कस्टमर केयर में कॉल करने जा रहे हैं तो एक बार फिर से सोच लीजिए। यह सेवा अब मुफ्त नहीं रह गई है। टेलीकॉम ऑपरेटरों ने वैल्यू एडेड प्रॉडक्ट व अन्य जानकारी के लिए कस्टमर केयर में कॉल करने पर पैसा वसूल करना शुरू कर दिया है। हालांकि शिकायत दर्ज करवाने के लिए कंपनियों के टोल फ्री नंबर पर कस्टमर केयर में कॉल मुफ्त ही रहेगी। इस खबर से भले ही ग्राहकों को धक्का लगे, मगर टेलीकॉम कंपनियों ने कमाई का नया रास्ता खोज निकाला है। भारती एयरटेल, वोडाफोन एस्सार, एयरसेल, आइडिया व कुछ अन्य कंपनियां कॉल सेंटर के ग्राहक सेवा प्रतिनिधि (कस्टमर केयर रिप्रजेंटेटिव) से बात करने पर तीन मिनट तक की कॉल के 50 पैसे वसूलने लगी हैं। एक वोडाफोन स्टोर के प्रबंधक ने बताया कि कस्टमर केयर पर कॉल कर अगर उपभोक्ता हमारे एग्जिक्यूटिव से बात करता है तो हम उस कॉल के चार्जेज वसूलेंगे। शिकायत दर्ज करवाने की सुविधा टोन फ्री ही रहेगी। बैलेंस जानने, एकाउंट संबंधी जानकारी या आईवीआर सर्विस पर चार्ज नहीं लिया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि फिलहाल रिलायंस और टाटा डोकोमो ने यह सुविधा नि:शुल्क रखी है। जबकि जीएसएम में यह दोनों कंपनियां भी कस्टमर केयर पर कॉल के पैसे वसूलेंगी। दिनोंदिन घटती कॉल दरों से मुनाफे में कमी झेल रही कंपनियां अब ग्राहकों से पैसे वसूलने के नए-नए रास्ते खोज रही हैं। हालांकि कस्टमर केयर में प्रत्येक कॉल के पैसे काटना नियम के खिलाफ है। क्योंकि कंपननियां पहले ही अनिवार्य टोल फ्रीस सुविधा उपलब्ध कराने का दावा करती है।
कंपनियों के नये नियम से उपभोक्ताओं को काफी देर तक इंतजार में रखा जाता है। कई लोगों ने बताया कि कस्टमर केयर कॉल पेड होने के बाद भी उनकी समस्याओं का संतोजनक समाधान नहीं हो पा रहा है।
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झूलस रही है संतरे की आमिया बहार

समय से पहले ही पक गए गेहूं, दानों का नहीं हुआ समुचित विकास
नागपुर।
बीते मार्च महीने से संतरानगरी की गर्मी के चढ़े पारे के असर से न केवल जन जीवन परेशान है, बल्कि इसका असफर कृषि फसलों पर हो रहा है। बीते वर्ष में संतरे की जहां अच्छी पैदावार हुई थी। वहीं इस वर्ष अक्टूबर माह में होने बाजार में आने वाले संतरे की किस्म आमिया बहार इस भीषण गर्मी से अभी से ही झुलसना शुरू हो गया है। आग बरसाते आसामन से न केवल संतरे के पेड़ सूख रहे हैं, बल्कि आमिया बहार के पत्ते और फूलों पर भी काफी नकारात्मक असर पड़ रहा है। यदि समय पर बारिश नहीं हुइ तो इस बार संतरे के अधिक उत्पादन से खुशहाल किसान अगली पैदावार तक बदहाल हो सकता है। वहीं वर्तमान में बाजार में आ रहे मृग बाहार के संतरे पर भी भीषण गर्मी का असर पड़ा है। संतरे जल्द सूख रहे हैं।
वहीं पिछले दिनों भीषण बारिश से विदर्भ के खेतों में लहलहाती गेहूं का पर भी गहरा असर पड़ा था। बची हुई फसल फिलहाल पक जाने से अधिकतर किसान काट रहे हैं। वहीं कुछ जगह फसल अभी कच्चे होने से किसान पकने के इंतजार में है। लेकिन सप्ताह भर से अचानक चढ़े पारे का नकारात्मक इस अधकच्चे फसल पर भी होगा।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिनहोंने गेहू की बुआई देर से की थी, उनकी फसल ही अभी अधपक्की है। मार्च महीने से ही अचानक गर्मी अधिक होने से गेहूं के दाने समय से पहले पकने लगें हैं और दाने का भी समुचित विकास नहीं हो पाया है।
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रद्द हो सकती है साक्षात्कार प्रक्रिया

राष्ट्रपति भवन,मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी सक्रिय
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विवि में पदों की कथित नीलामी का मामला

नागपुर से प्रकाशित हिंदी दैनिक समाचारपत्र 'दैनिक 1857 इन दिनों वर्धा स्थिति महात्मा गांधी हिंदी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में होने वाली नियुक्तियों की कत्थित धांधली को लेकर हर दिन कोई न कोई खबर प्रकाशित कर रहा है। प्रकाशित खबरों का
से 5 अप्रैल से महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में होने वाले विभिन्न शैक्षणिक पदों के साक्षात्कार अब खटाई में पड़ते दिखाई दे रहे हैं। इस प्रक्रिया को रद्द करने के मामले में राष्ट्रपति भवन, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सक्रिय होने की जानकारी मिली है। इस संबंध में जब यूजीसी के अध्यक्ष सुखदेव थोराट से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वे अभी-अभी विदेश यात्रा से लौटे हैं। सारे प्रकरण को देखकर ही कोई निर्णय लेंगे।
इसी बीच सामाजिक संस्था 'द मार्जिनलाइज्डÓ इंस्टीट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव रिसर्च एंड मीडिया स्टडीज तथा छात्र संघर्ष समिति के भेजे गए पत्र के संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय और राष्ट्रपति सचिवालय के प्रेस निदेशक से बात की गई तो उन्होंने भी मामले को समझने के बाद जवाब देने के लिए कहा है। राष्ट्रपति भवन के प्रेस निदेशक अर्चना दत्ता से यह पूछा गया कि क्या महामहिम इस साक्षात्कार प्रक्रिया में होने वाली कत्थित धांधली को रोकने के लिए कुछ कदम उठाएंगी, तो उन्होंने कहा कि इस सवालों को जवाब वे बाद में ई-मेल से भेजेंगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की प्रेस निदेशक ममता वर्मा ने भी मामले की पूरी तहकीकात रिपोर्ट के बाद जल्द ही प्रेस को संबोधित करने का आश्वासन दिया। मामला मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल तक भी पहुंच गया है।
इधर विवि में नियुक्तियों के सक्रिय एजेंट संवाददाताओं को विभिन्न माध्यमों से धमका रहे हैं। यहां तक की ईमेल से गालियां देकर एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दे रहे हैं। वर्धा के एक पत्रकार ने बताया कि उसे ई-मेल प्राप्त हुआ है जिसमें उसे गालियां दी गई हैं और धमकाया गया है। वह इस संबंध में जल्द ही साइबर अपराध का मामला दर्ज कराने वाला है। 'दैनिक 1857Ó में प्रकाशित खबर से सक्रिय एजेंटों में खलबली मची है।
विवि सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया में और भी कई तरह की गड़बड़ी हो रही है। आरक्षण के रोस्टर में गड़बड़ी और गैर मंजूर पद पर नियुक्ति का मामला भी सामने आया है। गैर मंजूर पद में विवि के एक पूर्व एसोसिएट प्रो. के लिए एक ऐसा पद विज्ञापित किया गया है जो यूजीसी से स्वीकृत ही नहीं है। सूचना है कि इस पद के लिए राजस्थान के एक विवि में प्रोफेसर की नियुक्ति करीब तय मानी जा रही है। फिलहाल विवि की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित धांधली के मामला समाचार पत्र में आने से वर्धा में चर्चा का विषय बना हुआ है। विवि ने इस बार बड़े सुनियोजित तरीके साक्षात्कार के लिए बुलाये गए उम्मीदवारों के नाम वेबसाइट पर नहीं डाले हैं जिससे कि स्क्रिनिंग में छंटे हुए दूसरे उम्मीदवार कोर्ट जाकर स्टे ऑर्डर न ले आएं।
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हिन्दी विवि का जुगाड़ी कन्हैया त्रिपाठी!
नागपुर। दैनिक 1857 में प्रकाशित होने वाले हिन्दी विवि संबंधित समाचारों को पढ़ कर विवि के एक शोधार्थी कन्हैया त्रिपाठी ने अपनी आपत्ति जताई। उसकी आपत्ति को 2 अप्रैल के अंक में पेज 12 नंबर पर प्रकाशित किया गया। प्रकाशित खबर उसके खिलाफ नहीं थी। फिर भी उसने आपत्ति दर्ज कराई। पत्र में प्रकाशित खबर में कहीं भी उसके नाम का उल्लेख नहीं था। फिर भी वह स्वयं को यह मानते हैं कि जो कुछ कहा गया, उससे सीधा उनका संबंध है।
हमारे संवाददाता ने कन्हैया त्रिपाठी के बारे में जानकारी हासिल की। पहले तो कन्हैया त्रिपाठी खुद को शोधार्थी होने से इनकार करते हैं। वे स्वयं को वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं। सूचना है कि फिलहाल वे विवि में शोधार्थी हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार कन्हैया त्रिपाठी ने विवि में डायस्पोरा के लिाए आवेदन किया था। स्क्रीनिंग में ही उसका नाम छंट गया। इससे पूर्व उन्होंने विवि की ओर से अमेरिका जाने के लिए एक प्रस्ताव देकर 1.5 लाख रुपये भी मांगे थे, जिसे विवि के कुलपति वी.एन.राय ने नामंजूर कर दिया। इसके बाद ही कन्हैया त्रिपाठी व अन्य छात्रों ने हमारे संवाददाता सं संपर्क कर विवि में सक्रिय लॉबी के बारे में जानकारी दी। परंतु संवाददाता ने उसका नाम लिये बिना ही गुप्त आवेदक के नाम पर रिपोर्ट लिखी। इधर मामले में नया मोड़ देखकर त्रिपाठी कॉल लेटर लेने के लिए नया तिकड़म खेलते नजर आ रहे हैं। कन्हैया त्रिपाठी ने 'दैनिक 1857Ó को नया बयान लिख भेजा है। त्रिपाठी की चालाकी इस बात से सिद्ध होती है कि जब प्रकाशित रिपोर्ट में किसी व्यक्ति का नाम नहीं है, तो फिर वे 'आ बैल मुझे मारÓ की तरह स्वयं आगे क्यों आ रहे हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कन्हैया त्रिपाठी ने पूर्व कुलपति गोपीनाथन से किसान आत्महत्या पर डाक्यूमेंट्री के लिए विवि से अच्छा-खासा धन प्राप्त किया। अपनी तिकड़म से ही विवि की पिछली नियुक्तियों में बिना पात्रता लिए साक्षात्कार के लिए कॉल लेटर प्राप्त कर लिया। त्रिपाठी की महत्वाकांक्षाओं का आालम यह है कि उन्होंने बिना स्नातक के प्रथम कुलपति अशोक वाजपेयी से हिन्दी विवि में स्नातकोत्तर में दाखिला की अनुमति मांगी। बाद में स्नातक की डिग्री हासिल कर विवि के दूसरे कुलपति के कार्यकाल में दाखिला प्राप्त किया। महत्वाकांक्षा इतनी कि पी.एचडी. कर रहा एक शोधार्थी अंतरराष्ट्रीय विवि में प्रोफेसर, रीडर, व्याख्याता, असिस्टेंट रजिस्ट्रार से लेकर सेक्शन ऑफिसर तक के पदों के आवेदन करते हैं।
जानकारों का कहना है कि त्रिपाठी हर वीआईपी के कार्यक्रम में अपनी पुस्तक का जबरत लोकार्पण करवाते हैं। ऐसे ही एक प्रयास में पूर्व राज्यपाल कृष्णकांत शास्त्री के सुरक्षाकर्मियों से कन्हैया त्रिपाठी धक्के भी खा चुके हैं। वर्धा के एक पूर्व विधायक के घर से धक्के मारकर निकाला जा चुका है। उस वक्त फर्जी पत्रकार बना यह शख्स एक परिचित के बीचबचाव से गिरफ्तार होने से बचा है।