शनिवार, जनवरी 09, 2010

पुस्तक मेले से हटा बुलडोजर का खौफ


नागपुर। उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय पुस्तकमेले में किसी भी प्रकार की रूकावट न डालने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने शुक्रवार को मनपा के संबंधित विभाग को ताकीद की कि वे आयोजकों को 24 घंटे का समय दे, ताकि विभागीय उचित मापदंड को वे पूरा कर सकें। सुनवाई के दौरान अदालत ने मनपा से मेले के संबंध में ना-हरकत प्रमाण-पत्र नहीं देने का कारण भी जानना चाहा। परंतु मनपा के अधिकारी अदालत को अपने जवाब से संतुष्ट नहीं कर पाए। तब न्यायालय ने इसे अहम् से जोड़ते हुए उक्त निर्देश जारी किए। न्यायालय का आदेश आते ही आयोजन स्थल कस्तुरचंद में लगे राष्ट्रीय मेले के मुख्य द्वार से मनपा का बुलडोजर तत्काल हटा लिया गया और मेला पुन:प्रारंभ कर दिया गया। शाम को मेले में पुस्तक प्रेमियों का तांता लग गया। मेला समिति के सचिव चंद्र भूषण ने कहा कि मुझे न्यायपालिका पर विश्वास था और वह कायम रहा। हमें न्याय मिल ही गया। पुस्तक मेला समिति की ओर से इस मामले की पैरवी नागपुर के वरिष्ठ अधि. रमेश दर्डा, तुषार दर्डा तथा दिल्ली से नागपुर आए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कुमार कार्तिकेय ने की। कस्तुरचंद पार्क मैदान में 1 जनवरी से राष्ट्रीय पुस्तक मेला शुरू हुआ था, लेकिन 5 जनवरी को मनपा प्रशासन की ओर से मेले के मुख्यद्वार पर बुलडोजर लाकर खड़ा कर दिया गया और मेला बंद हो गया। यही नहीं 6 जनवरी को मेले से बिजली भी काट दी गई। मनपा ने कागज पूरा नहीं होने के कथित आरोप में मेले का जबरन बंद करवा दिया था। साहित्यकारों एवं पत्रकारों ने इस घटना को हिटलरशाही और तानाशाही करार दिया। मामला उच्च न्यायालय में गया और शुक्रवार को तत्काल घेराबंदी हटाने तथा पुस्तक प्रेमियों के लिए मेला खोलने का निर्देश जारी किया गया। मेला समिति के वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश दर्डा ने मेला परिसर में आमंत्रित संवाददाताओं को बताया कि अदालत के आदेश ने यह सिद्ध कर दिया है कि मनपा का कदम अधिकारियों के व्यक्तिगत अहम् के कारण उठाया गया था। अधिवक्ता कुमार कार्तिकेय तथा लोहिया अध्ययन केंद्र के हरिश अड्यालकर, नंद किशोर व्यास तथा वरिष्ठ समाजसेवी उमेश चौबे, राजेंद्र पटोरिया ने इसे नगर के साहित्यकारों तथा पुस्तक प्रेमियों की जीत बताई।
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मेले की अवधि बढ़ाने की मांगअदालती आदेश के बाद पुस्तक विक्रेताओं में हर्ष की लहर दौड़ गई। मेला परिसर में जश्र का वातावरण दिखाई दिया। पुस्तक विक्रेताओं ने चंद्रभूषण का स्वागत किया और उन्हें फूलमाला पहनाया। मिठाईयों का वितरण किया गया। मेले की अवधि आगे बढ़ाने के प्रश्न पर चंद्रभूषण ने कहा कि वे आपस में विचार कर इस की घोषणा करेंगे। किड्स एज्युकेश्नल एड्स नई दिल्ली की सचालिका मांसी सचदेवा ने कहा कि यह जीत हमारी नहीं यहां के पुस्तक प्रेमियों की जीत है। उन्होंने मेले के आयोजक चंद्रभूषण तथा अधिवक्ताओं की टीम की भी प्रशंसा की। श्रीमती सचदेवा ने मीडिया कर्मियों का भी आभार माना, जिन्होंने निष्पक्ष रूप से जानकारी प्रदान की। धारणा, ध्यान और मन सफलता, रोगों से छुटकारा, व्यक्तित्व विकास के लिए जैसी पुस्तक के रचैता स्वामी ब्रह्मज्ञानम् डॉ. दीनानाथ राय ने बताया कि हम यहां लोगों की सेवा करने लखनऊ से आए हैं। नागपुर आप का शहर है, आप कहें तो हम यहां से चले जाएंगे। लेकिन न्यायालय ने अच्छा फैसला किया, हमें खुशी है। उन्होंने अब तक योग एवं ध्यान पर 27 पुस्तकें लिखी है। मेला आयोजक चंद्रभूषण ने कहा कि मेला परिसर की बुलडोजर से घेराबंदी के समय मुझे आपातकाल की याद आ रही थी। लेकिन हमें न्याय मिला है और इतनी खुशी है कि प्रतिवर्ष नागपुर आते रहेंगे। गणित जैसे कठिन विषय को खेल खेल में छुड़ाने वाले शिवनाथ बिहारी भी प्रफुल्लित नजर आ रहे थे।

2 टिप्‍पणियां:

सतीश पंचम ने कहा…

य़े वर्ड वेरिफिकेशन की झालर हटा दो भई, टिप्पणी देने में बार बार आगे आ जाता है :)

अगर झंडू अधिकारी आएंगे तो ऐसे ही होगा....कम्बख्त नाच गाने के लिये जगह बिना पूछे ही अलॉट कर देंगे, कोई रैली वगैरह होने लगे तो बिना कुछ कहे धरे मैदान राजनितिक दलों के हवाले कर देंगे लेकिन जब कोई किताब मेला या अन्य कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम हो तो लगेंगे अपनी लाल करने.....इसी को अदालत ने शायद भांप लिया और अधिकारियों के अहम को जान आखिर उन्हें फटकार सी लगा ही दी।

सोचता हूँ, इन झंडू अधिकारियों को एक मानपत्र पकडा दूं ताकि उनके अहम को खुराक मिले और वह तृप्त महसूस करें :0

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सुखद समाचार!