बुधवार, जुलाई 07, 2010

न्याय नहीं मिला तो आंदोलन जारी रहेगा




नागपुर श्रमिक पत्रकार संघ ने दिया विभागीय आयुक्त को ज्ञापन
दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन का मांग

नागपुर। नागपुर श्रमिक पत्रकार संघ के पदाधिकारी, सदस्यों व गैर पत्रकारों ने 5 जुलाई को भारतबंद का कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों पर लाठीचार्ज के मामले में दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की मांग को लेकर विभागीय आयुक्त कार्यालय के पास विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन का निर्णय मंगलवार को ही एक बैठक में लिया गया था। सुबह 12:30 बजे प्रदर्शन के दौरान भारी बारिश हो रही थी। लेकिन मूसलाधार बारिश में भी आक्रोशित मीडियाकर्मियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ था। उन्होंने काले फीते लगाकर भीगते हुए विरोध प्रदर्शन किया। मीडियाकर्मियों के गुस्से को पहले ही भांपकर पुलिस ने यहां तगड़ा बंदोबस्त किया था। एक डीसीपी, चार एसीपी समेत अनेक पुलिसकर्मी यहां चौकस थे। पुलिसकर्मियों की भीड़ मीडियाकर्मियों से ज्यादा नजर आई।

प्रदर्शनकारी मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए नागपुर श्रमिक पत्रकार संघ के अध्यक्ष शिरीष बोरकर ने कहा कि पुलिस ने मीडियाकर्मियों पर जो हमला किया है, वह नहीं सहा जाएगा। जब तक दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित नहीं किया जाता, तब तक हमारा आंदोलन ऐसे ही जारी रहेगा। 'दैनिक 1857Ó प्रधान संपादक एस.एन. विनोद ने कहा कि पुलिस ने मीडियाकर्मियों पर तब लाठीचार्ज किया जब वे अपनी सच्ची ड्यूटी निभा रहे थे। उनका यह बर्ताव गलत है। जब तक उन दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। मीडियाकर्मियों पर हुआ हमला किसी भी सूरत में नहीं सहा जा सकता है।
मीडियाकर्मियों के विरोध प्रदर्शन को विदर्भ जनआंदोलन समिति के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने भी समर्थन दिया। उन्होंने प्रदर्शनकारी मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस का यह व्यवहार निंदनीय है। दूसरे के सुख-दु:ख की खबर से कवरेज कर सरकार को जगाने वाले मीडियाकर्मियों पर पुलिस का यह व्यवहार अत्याचार है। उन्होंने मीडिया द्वारा किए जा रहे विरोध को जायज ठहराते हुए कहा कि विदर्भ के आदिवासी और किसानों का समर्थन मीडियाकर्मियों के साथ हैं। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए।
रिपब्लिकन पार्टी के पार्षद प्रकाश गजभिये ने कहा कि भारत बंद को पूरी जनता का समर्थन था। यह बंद किसी एक पार्टी ने नहीं कराया था। प्रदर्शन के बाद मीडियाकर्मियों का जत्था विभागीय आयुक्त गोपाला रेड्डी के कार्यालय के अंदर पहुंचा। नागपुर श्रमिक पत्रकार संघ के अध्यक्ष शिरीष बोरकर ने भारतबंद के दौरान मीडियाकर्मियों पर हुए लाठी चार्ज के बारे में बताया। संघ के सचिव संजय लोखंडे ने लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबन का ज्ञापन दिया। विभागीय आयुक्त ने इस संबंध में जल्द ही कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार एस.एन. विनोद, महाराष्ट्र श्रमिक पत्रकार संघ के अध्यक्ष यदु जोशी, तिलक पत्रकार भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रदीप मैत्र, वरिष्ठ पत्रकार जोसेफ राव, स्वदेश के संपादक विश्वास इंदुरकर, लोकशाही वार्ता के विनोद देशमुख, इंडिया न्यूज के विदर्भ ब्यूरो के प्रमुख राजेश तिवारी, दैनिक 1857 के चीफ रिपोर्टर संजय कुमार, नेशनल संदेश के सीनियर रिपोर्टर अभय यादव, राजेश बागड़े, सीएनईबी के कैमरामैन रविकांत कांबले, पुण्यनगरी के फोटो जर्नलिस्ट प्रशिक डोंगरे, संजय लचुरिया, देवेश व्यास, दैनिक भास्कर के छोटू वैतागे, विनोद झाडे, लोकशाही वार्ता के जीवक गजभिये, स्वदेश के सौरभ,लोकसत्ता के ज्योति तिरपुडे, स्वदेश के धीरज पाटिल, लोकमत के अविनाश महाजन, नवभारत के अभिषेक तिवारी, लोकमत समाचार के जगदीश जोशी, तरुण भारत के दिलीप दुपारे,
टाइम्स ऑफ इंडिया के फोटो जर्नलिस्ट रंजीत देशमुख और सुदर्शन समेत नागपुर के मीडिया संस्थानों के अनेक पत्रकार और फोटो जर्नलिस्ट उपस्थित थे।
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सोमवार, जून 28, 2010

नागपुर सिटी




भाई की जिंदगी के लिए बेचती रही जिस्म

फरार मीना की तलाश जारी
नागपुर।
गत शनिवार को शहर की बदनाम गली में 15 लड़कियों के साथ पकड़ी गई खुशबू (परिवर्तित नाम) अपने भाई रोहित की जिन्दगी बचाने के लिए नागपुर में 8 महीने से गंगा जमुना की कश्मीरी गली में जिस्म फरोशी का काम कर रही है। पकड़े जाने के बाद यह रहस्य खुशबू ने उजागर किया कि उसका छोटा भाई रोहित इन लोंगो (धंधा कराने वाले) के चंगुल में था। उन्होंने उसे जान से मारने की धमकी दी थी। अगर वह उनका कहना नहीं मानती तो वह अपना भाई हमेशा के लिए खो देती। खुशबू के माता-पिता पहले ही मर चुके हैं। खुशबू को मुंबई से लेने पुलिस के साथ उसका मौसा आया था। खुशबू का छोटा भाई रोहित भी अपने मौसा के साथ नागपुर आया। रोहित को दिल्ली में मीनाबाई के भाई के घर रखा गया था। मीनाबाई सतीश कर्मावत (40)कश्मीरी गली का एक ऐसा नाम हैं जहां गरीब मजबूर लड़कियों को खरीदकर उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनसे जिस्म फरोशी का धंधा कराया जाता है। मीनाबाई मूलत: आगरा की पिपरेटा खेडागर की रहने वाली है। मीना के साथ पुलिस ने अनारकली, कृष्णा, मुन्नीबाई टिकाराम कालफोर, रुखसाना, कश्मीरी बाई, आशा बाई, स्नेहल बुद्धम राऊत ने खुशबू को जबरन धंधे में उतारा था। पुलिस मीनाबाई के एक भाई की तलाश में आगरा भी गई थी। लेकिन वह वहां नहीं मिला।
मीनाबाई के घर से नागपुर क्राइम ब्रांच और लकडग़ंज पुलिस ने संयुक्त रुप से कार्रवाई कर लड़कियों को पकड़ा। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान ग्राहक शैलेष मिलिन्द मेश्राम, आदाम इसा खान वर्धा तथा राकेश यादवराव राऊत को गिरफ्तार किया है।
मीनाबाई के घर से मिली लड़कियों में कई कम उम्र की लड़कियां भी हैं। मीनाबाई के पास खूशबू 8 महीने से है। पुलिस सूत्रों के अनुसार देह व्यापार का धंधा इतनी गहराई तक पैठ जमा चुका है कि एक धंधे वाला दूसरे धंधे वाले के पास अपनी लड़कियों को भेजता है और उसकी लड़कियों को अपने पास रखता है। इससे ग्राहकों को हर बार नई लड़की आई है का झांसा दिया जाता है। ग्राहक भी दलालों के झांसे में आ जाते हंै। नागपुर की गंगा जमुना में छापा मार कार्रवाई के दौरान खुशबू जब पुलिस के हाथ लगी तो एक ुपुलिसकर्मियों को उसने अपनी कहानी बताई कि उसे इस धंधे मेंं आखिर किस तरह ढकेल दिया गया। उस पुलिसकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खुशबू मूलत: मुंबई की रहने वाली हैं। उसके माता-पिता की मौत के बाद छोटे भाई की जिम्मेदारी उस पर आ गई। वह कुछ गलत लोगों के चंगुल में फंस गई। उन लोगों ने उसके छोटे भाई रोहित को अगवा कर नई दिल्ली भेज दिया। खुशबू को धमकी दी गई कि अगर वह धंधा नहीं करेगी तो उसके भाई को मार दिया जाएगा। वह मजबूर हो गई। 8 महीने पहले उसे नागपुर की मीनाबाई के पास भेजा गया। उसे यकीन दिलाने के लिए कि उसका भाई जिन्दा है। रोहित से खुशबू की बात कराई जाती थी। खुशबू के मौसा को जब यह बात पता चली कि वह नागपुर में मीनाबाई के पास है तो वह मुंबई अपराध शाखा पुलिस की मदद ली। मुंबई पुलिस ने अपराध शाखा नागपुर पुलिस के फोन पर जानकारी दी कि मुंबई से एक लड़की को अगवा कर जिस्म फरोशी के धंधे में लगाया गया है। खुशबू की पहचान के लिए उसका मौसा भी मुंह पर कपड़ा बांधकर नागपुर की बदनाम गली में पुलिस के साथ पहुंचा। मीनाबाई के देहव्यापार अड्डे पर जब नागपुर क्राइम ब्रांच ने लकडग़ंज पुलिस के साथ छापा मारा तो वहां पर खुशबू भी मिली। उसके मौसा ने उसे पहचान लिया। इस घटना की खबर मिलने पर रोहित को मीनाबाई ने पकड़े जाने के डर से आजाद कर दिया। रविवार को रोहित भी नागपुर पहुंचा। खबर लिखे जाने तक रोहित लकडग़ंज थाने में थानेदार मकेश्वर के समक्ष था। थानेदार मकेश्वर यह सच जानने की कोशिश कर रहे थे कि खुशबू ने जो आपबीती जो बताई उसमें कितना सच और कितना झूठ है।
- अभय यादव

रविवार, जून 27, 2010

पेट्रोल की कीमत 30 रुपये प्रति लिटर !

सरकार और मनपा चाहे तो नागपुर में सस्ता हो सकता है पेट्रोल
विशेष संवाददाता
नागपुर।
पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्य वृद्धि के खिलाफ विरोध और सरकार को निंदा करने का सिलसिला जारी है। लेकिन राज्य सरकार और स्थानीय निकाय (मनपा) चाहे तो नागपुर समेत राज्य भर में जनता को पेट्रोल की बढ़ी कीमतों से राहत मिल सकता है। पेट्रोलियम पदार्थ की कीमत बढऩे को क्रोध का टिकरा जनता केंद्र सरकार पर फोड़ रही है, लेकिन हकीकत यह है कि राज्य सरकार ने पेट्रोल पर 26 प्रतिशत का वैल्य एडेड टैक्स (वैट) लगा कर एक मोटी रकम अपनी तिजोरी में भर रही है। वहीं महानगर पालिका भी इससे कमाई करने में पीछे नहीं है। नागपुर महानगरपालिका ने तो पेट्रोल पर 4.5 प्रतिशत की दर से चुंगी कर लगा रखा है। यही हाल डीजल का भी है। राज्य सरकार डीजल पर 30 प्रतिशत का वैट कर वसूलती है। पेट्रोलियम व्यावसायी सूत्रों की मानें तो नागपुर में आने वाला पेट 30 रुपये प्रति लिटर होता है। लेकिन इसमें लगने वाले विभिन्न करों और डीलरों के कमिशन से इसकी दर बढ़ कर 50 रुपये प्रति लिटर से भी ज्यादा हो जाती है। ज्ञात हो कि नागपुर में पेट्रोल बेंगलोर के बाद सबसे ज्यादा महंगा है। तेल व्यावसायियों का कहना है कि यदि पेट्रोल से टैक्स हटा दिया जाए तो जनता को पूरी राहत मिलेगी। वर्ष 2009 में जब कू्रड के दर कम हुए थे तब अमेरिकी बाजार में पेट्रोल की औसत कीमत 16.92 रुपये प्रति लिटर था। वहीं भारत में यह कीमत 48.24 रुपये प्रति लिटर था।

बुधवार, जून 23, 2010

हाथ से निकल गई है कश्मीर की समस्या


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पत्रकार रविन्द्र दाणी की पुस्तक 'मिशन कश्मीरÓ का विमोचित

संजय स्वदेश
नागपुर।
आज कश्मीर की स्थिति हाथ से निकल चुकी है। चीन ने भी भारत में अतिक्रमण शुरू कर दिया है। इसमें मासूम जनता बेवजह पीस रही है। कुछ दिनों बाद असाम व तिब्बत के हालात भी ऐसे ही हो जाएंगे। यह कहना है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी का। वे कश्मीर समस्या से संबंधित विविध पहलुओं पर पत्रकार रविंद्र दाणी की पुस्तक 'मिशन कश्मीरÓ के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। सिविल लाइन्स स्थित डा. वसंतराव देशपांडे सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन सरसंघचालक मोहन भागवत के हाथों हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षत गंजू हेमटोलाजी ने की। प्रमुख अतिथि के रूप में कश्मीर के पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एस.के. सिन्हा उपस्थित थे। गड़करी ने कहा कि भाजपा का अध्यक्ष बनने के बाद मुझे पहली बार कश्मीर जाने का मौका मिला। कश्मीर के जनता के विचार के काफी अलग है। आजकल हमारे देश के सभी निर्णय दिल्ली में होते हैं, वह भी अमेरिकी दवाब में। देश की बाह्य व आंतरिक सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि कहा कि देश को इन बड़ी चुनौतियों से लडऩा है। गडकरी ने पुस्तक पर चर्चा करते हुए कहा कि इसमें कश्मीर के विविध मुद्दों को शामिल किया है। इस किताब को सभी पढ़े। उन्होंने रविंद्र दाणी का अभिनंदन किया।

हर व्यक्ति से जुड़ा है कश्मीर : भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि कश्मीर की समस्या देश के प्रत्येक नागरिक से जुड़ी हुई है ना कि किसी पार्टी या किसी व्यक्ति विशेष से। इस पर हर किसी को विचार करना चाहिए। कश्मीर पर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं। नागपुर में इसके बारे में कई कार्यक्रम हुए। कश्मीर में 60 साल के सत्य की प्रतिक्षा चल रही है। परंतु परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। यह सवाल देश की एकता अखंडता से जुड़ा हुआ है। कश्मीर भारत का ही एक हिस्सा है, इसे ऐसे ही तो किसी को नहीं दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा व्यवस्था ऐसी हो जिससे हर मासूम अपने गांव में निर्भय से रह सके। पुस्तक के प्रकाशन के अवसर पर कश्मीर के पूर्व राज्यपाल एस. के. सिन्हा ने कश्मीर में हुए विविध युद्धों के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का एक अटूट अंग है। कश्मीर की समस्या का समाधान कठोर निर्णय से ही संभव है।
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रविवार, जून 20, 2010

मम्मी मुझे पापा से मिलने दो



नागपुर। रविवार को 'फादर डे' के मौके पर कई लाड़लों ने अपने पापा को विश करते हुए उन्हें छोटे-मोटे उपहार देकर उनका दिल जीता लेकिन वहीं नागपुर के कई बच्चे और अभिभावक रविवार की सुबह रामदासपेठ स्थित लैंड्रा पार्क में उपस्थित हुए। यहां आए बच्चे अपने पापा का प्यान पाने के लिए जज साहब से गुहार लगाने की तख्ती लिए हुए थे।

वहीं अभिभावक वर्षों से अपने लाडले-लाडलियों की एक झलक नहीं पाने की कसक दिले में लिए हुए आपस में चर्चा कर रहे थे। दरअसल ये सभी लोग दहेज विरोधी कानून 498-ए के तहत पीडित पति और बच्चे थे। ये सेव इंडिया फैमिली फाऊंडेशन नागपुर शाखा के बैनर तले यहां एकत्रित होकर फादर दिवस के मौके पर सरकार और न्यालय से इस धारा के तहत चल करे मामलों में बच्चों को पिता केस साथ मिलने की छूट देने की मांग कर रहे थे।

मोहन बावेटकर ने बताया कि वे खाड़ी देश में अच्छे जॉब में थे। लेकिन घरेलू विवाद में पत्नी ने 498-ए के तहत मामला दर्ज कराया। जॉब तो गई ही। मेरी पूरी जिंदगी तबाह हो गई। साढ़े तीन साल से बेटी का चेहरा तक नहीं देखा। जब अंतिम बार बेटी का चेहरा देखा था, तब वह दो माह की थी। अब तो उसका चेहरा भी ठीक से याद नहीं। राष्ट्र परिवहन विभाग में तैनात अनिल फूल ने बताया कि उने के लिए फादर डे को कोई मायने नहीं है। जब से पत्नी ने 498-ए के तहत मामला दर्ज कराया है। तब से बेटे की सूरत देखने के लिए तरस गया है। 9 साल से बेटे की एक झलक पाने की मन में लालसा लिये कानून की कमजोरी को कोस रहा हूं।

फाऊंडेशन के नागपुर शाखा के प्रमुख राजेश बखारिया ने बताया कि नागपुर हजारों ऐसे लोग हैं जिन्होंने वर्षों से अपने बेटी-बेटे की सूरत नहीं देखी। दरअसल 498-ए के तहत चल रहे मामले में करीब 90 प्रतिशत बच्चे मां के साथ ही रहते हैं। पिता के द्वारा कोर्ट से बच्चों से मिलने की गुहार लगाने के बाद जब मां को बच्चे को उसके पिता से मिलाने के लिए कहा जाता है, करीब 70-80 प्रतिशत मामले में महिलाएं बच्चे लेकर आती ही नहीं है। वे किसी न किसी तरह का बहाना बना देती है। इसपर कोर्ट किसी तरह की कार्रवाई नहीं करती है।

बाखरिया ने बताया कि 498-ए के पीडित लोग नागपुर के फैमिली कोर्ट में गत एक माह से इस बात अभियान चला रहे थे कि फादर डे के दिन उनके बच्चों से जरूर मुलाकात कराया जाए। क्योंकि बच्चों के परवरिश के दौरान उनके मन पर मां के साथ पिता का भी महत्वपूर्ण असर पड़ता है। लेकिन इस धारा के तहत फंसे लोग बच्चों की एक झलक पाने के लिए मोहताज रहते हैं।

मंगलवार, जून 15, 2010

बिहार में कांग्रेस का खोया जानाधार वापस लाएंगे मराठी माणुस

संजय स्वदेश
गत वर्ष महाराष्ट्र राज्य विधानसभा में भाजपा को करारी मात देने वाली कांग्रेस अब आगामी बिहार चुनावों में सत्तारुढ़ गढ़बंधन को करारी शिकस्त देने की योजना में है। मजेदार बात यह है कि जिस महाराष्ट्र में 'बिहारी माणुषÓ को प्रांतवाद के नाम पर प्रताडि़त किया गया, उसी प्रदेश के स्थानीय नेता बिहार की राजनीति में कांग्रेस के खोया जनाधार जुटाएंगे। मतलब, आगामी बिहार चुनावों में कांग्रेस के लिए मराठी मानुष बिहारियों का दिल जीतने की कोशिश करेंगे।
कांग्रेस आलाकमान ने रामटेक के सांसद और केंद्रीय समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मुकूल वासनिक को बिहार का प्रभारी और महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य संजय दत्त को चुनाव 'वार रूमÓ का मुख्य समन्वयक बनाया गया है। इसके अलावा महाराष्ट्र के दर्जन भर से ज्यादा नेताओं को बिहार चुनाव के लिए जिल पर्यवेक्षक बनाया गया है। खबर है कि इस बार बिहार चुनाव में कांग्रेस स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरेगी। सोमवार को कांग्रेस मुख्यालय में मुकूल वासनिक के नेतृत्व में बिहार चुनाव को लेकर बैठक हो चुकी है। बैठम में बिहार के 39 जिलों में से 7 जिलों का चुनाव पर्यवेक्षक महाराष्ट्र के नेताओं को बनाया गया है। इसमें पूर्व केंद्रीयमंत्री सुबोध मोहित को रोहतास जिला, विधायक सुनील केदार को किशनगंज, विधायक राजेंद्र मुलक को कटिहार, हुसैन दलावाई को पुर्णिया, मोहन जोशी को बक्सर, पूर्व सांसद हरि राठौड़ को अररिया और रंजन भोंसले को गया जिले का चुनाव पर्यवेक्षक बनाया गया है। इसके अलावा राजस्थान के करीब डेढ़ दर्जन नेता भी बिहार चुनावों में पर्यवेक्षक की भूमिका में होंगे।
ज्ञात हो कि पहले बिहार में कांग्रेस का प्रभार सिख दंगों के दांगी नेता जगदीश टाइटलकर को दिया गया था। लेकिन अब उनसे यह प्रभार लेकर मुकूल वासिनक को दे दिया गया है। वासनिक को बिहार चुनाव में कांग्रेस के खोये जनाधार को वापस लाने के लिए पूरी आजादी भी दे दी गई है। मतलब बिहार चुनाव के दौरान कांग्रेस के हर निर्णय में अब मुकूल वासनिक की खूब चलेगी। राजस्थान में विधानसभा चुनाव के दौरान मुकूल वासनिक ने ही प्रभार संभाला था। उन्होंने अपनी कुशल रणनीति से कांग्रेस को सत्ता में वापसी कराई। इसलिए वे कांग्रेस अलाकमान के विश्वासपात्र हो गये। कांग्रेस ने टाइटलगर की जगह बिहार में इन्हें मौका देना उचित समझा है।

शनिवार, जून 12, 2010

सीखा दाखिले का स्टंट, बन गए एजेंट

प्रबंधन कोटे से दाखिले के लिए जम कर वसूला जा रहा है डोनेशन/ कई छात्र कर रहे कालेजों की दलाली!
संजय
नागपुर।
इन दिनों नागपुर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में दाखिले की धूम मची हुई है। हर कोई मनपसंद के कॉलेज में दाखिला लेना चाहता है। सीट कम होने से कारण दाखिले की स्पर्धा बढ़ गई है। लेकिन इन्हीं सबके बीच कुछ विद्यार्थियों में दलाली का काम शुरू कर दिया है। इनमें सबसे ज्यादा इंजीनियरिंग संस्थानों के वे विद्यार्थीं हैं, जिन्होंने दूसरे राज्यों से आकर यहां दाखिला लिया है। वे अपने ही क्षेत्र से जान पहचान के विद्यार्थियों को दाखिला प्रबंधन कोटे से अपने संस्थान में करवा कर मोटी दलाली वसूल रहे हैं। इसके अलावा कुछ बाहरी दलाल भी सक्रिय हैं।
ज्ञात हो कि नगर में तकनीकी शिक्षण संस्थानों में राज्य के बाहरी विद्यार्थियों को दाखिला प्रबंधन कोटे से ही मिलता है। शिक्षण संस्थानों को भी इस कोटे से दाखिला देने पर अच्छी कमाई हो जाती है। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने इस तरह के डोनेशन लेकर दाखिला देने वाले शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया है। इसके बाद भी विभिन्न संस्थानों में डोनेशन लेकर दाखिले का खेल जारी है। शिक्षण संस्थान प्रबंधन कोटे से बाहरी विद्यार्थियों को दाखिले के एवज हर साल की तरह इस वर्ष भी लाखों रुपये वसूल रहे हैं। इसके लिए कई दलाल सक्रिय हैं। दूसरे प्रदेशों से आने वाले विद्यार्थियों को दाखिले की पूरी प्रक्रिया और प्रबंधन कोटे की सीट के तहत दाखिला लेने का रास्ता नहीं मालूम होता है। इसलिए वे सक्रिय दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं। प्रबंधन कोटे के तहत दाखिले का डोनेशन की रकम हर संस्थान का अलग-अलग है। सबसे ज्यादा डोनेशन हिंगणा स्थित प्रियदर्शिनी कॉलेज का है। सूत्रों की मानें तो इन दिनों यहां सबसे ज्यादा 3 से 4.50 लाख तक रुपये की डोनेशन मांगी जा रही है। इसमें प्रबंधन के साथ-साथ दाखिला कराने वाले एजेंट का भी कमीशन है। सबसे ज्यादा डोनेशन बी.टेक टेलीकम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक संकाय का है। जिन विद्यार्थियों ने पिछले वर्ष किसी एजेंट के चक्कर में पड़ कर मोटी रकम खर्च कर दाखिला लिया था, वे एक साल के अंदर प्रबंधन कोटे से दाखिला की प्रक्रिया पूरी तरह से समझ चुके हैं। उन्हें लगता है कि उसे बाहरी एजेंट से कुछ ज्यादा रकम लेकर यहां दाखिला लिया है। यहां शिक्षकों से जान-पहचान होने के बाद यह रास्ता सरल हो चुका है। झारखंड से आकर प्रियदर्शनी कॉलेज में बी.टेक इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई करने वाले एक छात्र ने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर बताया कि पिछले साल उसने एक बाहरी एजेंट को ढाई लाख रुपये देकर यहां दाखिला लिया था। तब उसे यहां दाखिले की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं थी। जब पैसा ही खर्च करना है तो सीधे प्रबंधन से संपर्क कर मोलभाव किया जा सकता है। इसके लिए इस वर्ष वे अपने ही क्षेत्र के ऐसे विद्यार्थियों की तलाश में हैं जो यहां दाखिला लेना चाहते हैं। प्रबंधन की ओर से भी ऐसे विद्यार्थी लाने पर एक अच्छी-खासी रकम कमीशन के रूप में मिलने के संकेत मिल चुके हैं। एक बाहरी एजेंट ने बताया प्रबंधन कोटे से दाखिला कराने पर अब पहले की तरह कमाई नहीं होती है। अब तो दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को खोजना पड़ता है। उसने बताया कि जिन विद्यार्थियों ने पिछले वर्ष दाखिला लिया था, वे ही सीधे अपने क्षेत्र के विद्यार्थियों से संपर्क कर उन्हें प्रबंधन से मिला रहे हैं और कमीशन ले रहे हैं।

सोमवार, जून 07, 2010

कभी घुसपैठियों का सर्वे नहीं हुआ


कभी घुसपैठियों का सर्वे नहीं हुआ : ज्योतिप्रसाद
संजय स्वदेश
नागपुर।
बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर असम में घुसपैठ हो रही है, इसमें अल्पसंख्यकों की संख्या ज्यादा होने के कारण स्थानीय अल्पसंख्याक बहुत ही कम हो गए हैं। यह कहना है असम के पूर्व मुख्य सचिव ज्योति प्रसाद राजखोवा का। वे नागपुर के रेशिमबाग में संघ शिक्षा वर्ग की तृतीय वर्ष समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। राजखोवा ने कहा कि घुसपैठियों में मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या ज्यादा है। परिवार नियोजन नहीं होने से उनकी संख्या दिनों दिन बढ़ते ही जा रही है। देश में कभी घुसपैठियों का सर्वे नहीं हुआ। इसकी मांग हमने बार-बार की है। जनगणना व मतदाता जैसी महत्वपूर्ण पहल से घुसपैठों को दूर रखना चाहिए। नहीं तो इन्हीं के सहारे ये घुसपैठिये राजनीति में अपनी पैठ बना लेंगे। नेपाल से प्रत्यक्ष कोई समस्या नहीं हैं। लेकिन नेपाल माओवादी का कट्टर पक्षधर है। बताया जाता है कि माओवादियों के पास उत्कृष्ट दर्जे के 20,000 से अधिक अत्याधुनिक हथियारें हैं।
राजखोवा ने कहा कि ब्रम्हपुत्र नदी पर चीन द्वारा निर्माण की जा रही विद्युत संयंत्र देश के लिए खतरे की घंटी है। इसकी जानकारी होने के बावजूद केंद्र सरकार को चुप्पी साधी हुई है। चीन सरकार ब्रम्हपुत्र नदी पर विद्युत संयंत्र बना कर भारत अनगिनत संकट पैंदा कर सकती है। देश में धर्म परिवर्तन के लिए कहीं दबाव तो कही लोभ-लालच का इस्तेमाल हो रहा है, यह देश के लिए चिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि असम में उग्रवाद व घुसपैठ रोकने के लिए केंद्र के पास कोई ठोस उपाय योजना नहीं है।
सरकार की नियम और नीति में फर्क : मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंचालक मोहन भागवत ने कहा कि स्वंयसेवक संघ जो बात वर्षों से कह रहा है, वह बात असम के अध्ययनशील ज्योतिप्रसाद द्वारा व्यक्त किया जाना, यह सिद्ध करता है कि स्वंयसेवक संघ ने तब असम के बारे में सही जानकारी हासिल कर उचित बयान जारी किया था। यह समस्या सिर्फ असम की नहीं बल्कि संपूर्ण भारत की है। केंद्र को सबकुछ मालूम होते हुए भी वर्तमान स्थिति को स्वीकार नहीं करना सिर्फ और सिर्फ राजनैतिक स्वार्थ है। हमारी सरकार व प्रशासन की नियत व नीति में काफी फर्क है। देश में जनगणना को दौर चल रहा है। इसमें नागरिकता जोड़ दी गई है। जबकि दोनों अलग-अलग मुद्दे ही नहीं, इनका अलग-अलग नियम है। देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रत्येक देशवासियों को है। सरकार व प्रशासन में बैठे लोग स्वार्थ के लिए स्वंय को भोलाभाला दर्शा रहे हैं। जनगणना के लिए विशेषज्ञों की राय लेकर शुरुआत करनी चाहिए थी। इस बार ओबीसी की गणना, जनगणना के साथ जरूर होगी। लेकिन उनका विकास मुमकिन नहीं है। कुल मिलाकर सत्ता में कबिजों को राष्ट्र की स्पष्ट कल्पना नहीं है, उन्हें सिर्फ मतों का स्वार्थ है।
कश्मीर की समस्या सर्वत्र चर्चित है। लेकिन समस्या जस के तस हैं। नक्सलवादियों के कदम दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं और केंद्र अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग बयान बाजी कर रहा है। मालूम हो कि आंध्र में राजनैतिक पार्टी व नक्सलवादियों के साथ चुनावी गंठबंधन हुई थी। इसीतरह छत्तीसगढ़ में भी सांठगांठ के लिए प्रेरित करने की मंशा नजर आ रही है। देश के शिक्षाविदों से विदेशी घबरा रहे है तो दूसरी ओर देश में विदेशी शिक्षा को प्रवेश देकर अपनी खिल्ली उड़ाई जा रही है। श्री भागवत के संबोधन के पश्चात कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।
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शनिवार, जून 05, 2010

पर्यावरण संरक्षण का काम कम, दिखावा ज्यादा

नागपुर। विश्व पर्यावरण दिवस पर शनिवार को शहर में अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गए। विभिन्न संगठनों ने अलग-अलग तरीके से पर्यावण दिवस मनाया। कहीं रैली निकाली गई, तो कहीं पर्यावरण के थीम पर पोस्टर बनाओ प्रतियोगिता आयोजित हुई। कुछ संगठनों ने सेमिनार का आयोजन कर पर्यावरण के खतरे को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। पर्यावरण दिवस पर इस क्षेत्र से जुड़े अधिकर विद्वानों ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को ले कर काम कम और दिखावा ज्यादा हो रहा है।
साइकिल चलाओ, पर्यावरण बचाओ
मराठी विज्ञान परिषद के अध्यक्ष अशोक भट्ट ने बताया कि मनुष्य की मानसिकता जब तक नहीं बदलती, तब तक पर्यावरण संतुलन नहीं हो सकता। मनुष्य ही सबसे बड़ा प्रदूषक है। ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को देखते हुए सभी लोगों को साइकिल का इस्तेमाल करना चाहिए। वायु प्रदूषण कम करने के लिए यही एकमात्र उपाय है। इसके प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए मराठी विज्ञान परिषद की ओर से महाराष्ट्र स्तर पर 1 जुलाई से 'चलो साइकल चलाएÓ कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा।
वन कर्मचारियों को जंगल की चिंता नहीं
वन व्यवस्थापन कार्य से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सूर्यभान खोब्रागड़े ने बताया कि जंगल की कटाई से पर्यावरण का नाश हो रहा है। इसके लिए सरकार के बदलते कानून जिम्मेदार हैं। वन कर्मचारियों को ही जंगल की चिंता नहीं है। वन कर्मचारी बढऩे से वन संपत्ति नष्ट हो रही है। वन कर्मचारी नौकरी के जगह पर नहीं रहते। इससे शिकार, जंगल कटाई और रात में होने वाली अवैध यातायात से जंगल के प्राणी मर रहे हंै। वाहन में केरोसिन के इस्तेमाल से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। सिर्फ समिति व्यवस्था करके शिकार एवं जंगल कटाई पर रोक नहीं लगाई जा सकती। इसके लिए कानून पर अमल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वनविकास मंडल के माध्यम से वृक्षरोपण होता है। परंतु बड़े-बड़े वृक्ष जैसे आम, नीम, इमली आदि वृक्ष तोड़कर गुलमोहर एवं सागवान के वृक्ष लगाए जाते हैं। उससे जंगल कटाई और बढ़ रही है। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण रखने के लिए 'वृक्ष लगाओ, वृक्ष बचाओÓ सिर्फ कगजों पर नहीं बल्कि प्रत्यक्ष में उस पर कृति होनी चाहिए। वृक्ष प्राणवायु देते हैं और कार्बन-डायऑक्साईड का शोषण करते हंै। लेकिन यह वृक्ष सिर्फ सजावट के लिए नहीं बल्कि पर्यावरण संतुलन में काम आए।
फैशन हो गया है दिवस मनाना
नि:सर्ग संरक्षण संस्था के सचिव दिलीप गाड़े ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिन मनाना फैशन जैसे हो गया है। जितनी समाज में जागृती हो रही है उतनी ही पर्यावरण समस्याएं बढ़ रही है। भारतीय संस्कृति में पानी को पवित्र माना गया है। किसी भी पूजा से पहले जल की पूजा की जाती है। किंतु नदी, तलाब में ही पूरे शहर की गंदगी छोड़ी जा रही है। कन्हान, पीली नदी में नागपुर का गंदा पानी छोड़ा जाता हैं। पिछले 10 वर्षों से प्रदूषण नियंत्रण विभाग प्रशासन को नोटिस भेज रहा है फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। इसके लिए पर्यावरण संरक्षण कानून अमल में लाना जरूरी है। गाड़े का कहना है कि पर्यावरण दिवस मनाने के बजाय कार्यों पर बल देना चाहिए। पर्यावरण का अर्थ सिर्फ वातावरण से नहीं बल्कि अन्न-धान्य से भी है। नदी, नालों में प्रदूषण बढऩे से उसका परिणाम खेतों में होनेवाले फसलों पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी राज्य में पर्यावरण की समस्या नहीं थी। वह अशिक्षित थे, परंतु उन्हें वन का महत्त्व मालूम था।
काम कम दिखावा ज्यादा
ग्लोबल एनवायरमेंट संस्था के सचिव दिनेश घोलासे ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण के लिए सरकार की यंत्रणा जिम्मेदार है। मनुष्य तथा अन्य वन जीवों को अपने जीवन के प्रति संकट का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषित पर्यावरण का प्रभाव पेड़-पौधों एवं फसलों पर हो रहा है। समय के अनुसार वर्षा न होने पर फसलों का चक्रीकरण भी प्रभावित हुआ है। प्रकृति के विपरीत जाने से वनस्पति एवं जमीन के भीतर के पानी पर भी इसका बुरा प्रभाव देखा जा रहा है। जमीन में पानी के स्त्रोत कम हो गए हैं। इस पृथ्वी पर कई प्रकार के अनोखे एवं विशेष तितली, चिडिय़ा, कौए, गिद्ध जैसे वन्य जीव, पौधें गायब हो चुके हैं। बड़े-बड़े उद्योगपति पर्यावरण दिन के नाम पर कार्यक्रम लेकर दिखावा करते हंै। नए फंड, नई योजनाएं सिर्फ कागज पर होती है। सिर्फ 1-2 प्रतिशत लोग ही सही मायने में काम करते हैं। अपनी जन्मदाती पृथ्वी का सरंक्षण करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
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