गुरुवार, जुलाई 15, 2010

खैरलांजी मामले में फांसी की सजा बदली उम्रकैद में

अब सभी 8 आरोपियों को 25 वर्ष की उम्रकैद
(0) वीडियो कांफ्रेंस के जरिये सुनाया गया फैसला
(0) सुप्रीम कोर्ट में दी जाएगी फैसले को चुनौती
नागपुर।
मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने बुधवार को खैरलांजी हत्याकांड मामले के 6 दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद की सजा में तब्दील कर दिया है जो 25 साल की होगी।
मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दो अन्य दोषियों की सजा भी 25 साल कर दी गई है। मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति ए.पी. लवांदे ने कहा कि सभी आठों दोषियों को 25 साल की सजा काटनी होगी। इस सजा में वह अवधि भी शामिल होगी जो ये दोषी जेल में बिता चुके हैं। न्यायालय का फैसला आने के बाद नागपुर में कुछ स्थानों पर टायर जलाकर तथा दुकानें बंद कर विरोध किया गया।
उल्लेखनीय है कि भंडारा जिले के खैरलांजी गांव में 29 सितंबर 2006 को उत्तेजित भीड़ ने एक दलित परिवार के 4 सदस्यों की नृशंस हत्या कर दी थी। मृतकों के नाम सुरेखा भैयालाल भातमांगे, उसकी बेटी प्रियंका, दो पुत्र सुधीर और रोशन थे।
यह फैसला न्यायमूर्ति लवांदे ने सुनाया और न्यायमूर्ति आर.सी. चव्हाण वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से उनके साथ थे। वे किसी काम के सिलसिले में मुंबई हाईकोर्ट गए थे। यह पहला अवसर है जब किसी खंडपीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति ने बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की अपीलें खारिज कर दीं।
भंडारा जिला सत्र न्यायालय ने 24 सितंबर 2008 को सकरू बिंजेवार, रामू धांडे, शत्रुघ्न धांडे, विश्वनाथ धांडे, जगदीश मांडलेकर और प्रभाकर मांडलेकर को फांसी की सजा सुनाई थी। जबकि गोपाल बिंजेवार और शिशुपाल धांडे को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। राज्य सरकार ने फांसी की सजा पर मुहर लगाने तथा सीबीआई ने उम्र कैदियों की सजा फांसी में बदलने एवं एट्रासिटी एक्ट के तहत सभी दोषियों पर सजा बरकरार करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जबकि बचाव पक्ष की ओर से निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करने के बाद अदालत ने 131 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि भोतमांगे परिवार के सदस्य सुरेखा और प्रियंका ने सिद्धार्थ गजभिए के साथ आरोपियों की हुई मारपीट के संदर्भ में गांववालों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। उसी का बदला लेने के उद्देश्य से यह हत्या की गई। हत्या का कारण देखते हुए इसे 'रेअरेस्ट ऑफ रेअरÓ नहीं माना जा सकता है। संपूर्ण मामले के पीछे बदले की भावना दिखाई दे रही है। जिसे देखते हुए फांसी की सजा नहीं दी जा सकती है। केवल अनुसूचित जाति के होने के कारण यह हत्या होने का कोई सबूत या कारण दिखाई नहीं दे रहा है जिससे एट्रासिटी एक्ट की धारा भी लागू नहीं हो सकती है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सीबीआई की ओर से धारा 354 के तहत अपील ही नहीं की गई थी। दूसरी ओर अभियोजन पक्ष को एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हुई, इसकी खुलासा भी नहीं किया गया है। उक्त सभी कारणों को देखते हुए फांसी की सजा को 25 वर्ष की उम्र कैद में बदलने का आदेश दिया। 5-5 हजार का जुर्माना भी ठोंका। जुर्माना नहीं भरने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त सजा के आदेश भी दिए। फैसले के बाद बचाव पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे एड. सुदीप जायसवाल एवं एड. नीरज खांदेवाले ने बताया कि हाईकोर्ट के इस फैसले को भी सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।

भैयालाल ने जताई नाराजी
खैरलांजी हत्याकांड से बचे भोतमांगे परिवार के एकमात्र सदस्य भैयालाल भोतमांगे हाईकोर्ट के फैसले से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय का नतीजा अनपेक्षित है। मुझे न्याय दिलाना हो तो सुप्रीम कोर्ट में अपील की जानी चाहिए। उन्होंने इस बात को लेकर नाराजी जताई कि किसी भी आरोपी को फांसी की सजा नहीं सुनाई गई।

बचाव पक्ष खुश
दूसरी ओर बचाव पक्ष ने इस फैसले पर खुशी जाहिर की। एडवोकेट सुदीप जायसवाल और नीरज खांदेवाले ने बताया कि हमारी भूमिका पहले भंडारा न्यायालय ने मंजूर की और अब हाईकोर्ट ने। सीबीआई के वकील एजाज खान ने बताया कि आरोपियों का अपराध न्यायालय ने मंजूर किया और उन्हें कौन सी सजा दी जानी चाहिए यह न्यायालय का अधिकार है। हम कोर्ट के निर्णय से खुश हैं।
सुप्रीम कोर्ट में अपील करें : आंबेडकर
भारिप-बहुजन महासंघ के नेता प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि भोतमांगे परिवार को जिस निर्ममता से खत्म किया गया, उसका विचार न्यायालय ने नहीं किया है। राज्य सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र अपील करनी चाहिए। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को दुर्भाग्यजनक करार दिया। उन्होंने सवाल दागा कि क्या जाति आधारित राजनीति का झटका हमारे कानून को लगना शुरू हो चुका है?
मुख्यमंत्री से मिलेंगे कवाड़ेपीपल्स रिपा के नेता जोगेंद्र कवाड़े ने बताया कि इस मामले में अनुसूचित जाति-जमाती अत्याचार प्रतिबंधक कानून के तहत आरोप को क्यों हटाया गया यह समझ से बाहर की बात है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।
... तो आंदोलन करेंगे : सुलेखा
रिपा नेता व पूर्व राज्यमंत्री सुलेखा कुंभारे ने इस निर्णय को दुर्भाग्यजनक करार दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का पुनर्विचार नहीं किया गया तो आंदोलन करना पड़ेगा।
वर्धा में रोकी गीतांजलि
इस फैसले के विरोध में वर्धा में कुछ संगठनों ने गीतांजलि एक्सप्रेस को रोक दिया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ट्रेन आगे बढ़ पाई। समूचे भंडारा जिले में कड़ा पुलिस बंदोबस्त लगाया गया है। वर्धा, गोंदिया, अकोला में भी तगड़ा पुलिस बंदोबस्त लगाया गया है।
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फैसले के विरोध में प्रदर्शन

खैरलांजी प्रकरण के आरोपियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदले जाने का शहर में विरोध किया गया। टायर जलाकर विरोध करने वाले दो युवकों को सक्करदरा पुलिस ने हिरासत में लिया है। कोराडी, रिजर्व बैंक, चौक और कमाल चौक में भी विरोध जताया गया।
भंडारा जिले के खैरलांजी गांव में सितम्बर 2006 में भैयालाल भोतमांगे की पत्नी सुरेख, बेटी प्रियंका और दो बेटों सुधीर तथा रोशन की हत्या कर दी गई थी। हत्या को मामले में बुधवार को मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने सभी आठों आरोपियों को फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। इस फैसले (निर्णय) के विरोध में शहर के कोराडी, रिजर्व बैंक चौक, सक्करदरा और कमाल चौक में विरोध जताया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार कोराडी इलाके में खैरलांजी प्रकरण के फैसले के विरोध में कुछ लोगों ने विरोध जताया। पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त होने के कारण विरोध शांतिपूर्ण ढंग से किया गया। रिजर्व बैंक चौक मेें भी उक्त फैसले का विरोध प्रदर्शन किया गया। सक्करदरा इलाके के सुबेदार ले-आऊट ठवरे कालोनी में नितिन मानवटकर (28) और सत्यम पाटिल ने टायर जलाकर क्षेत्र में अशांति फैलाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उक्त दोनों को हिरासत में ले लिया। कमाल चौक में भी कुछ समय के लिए दुकानें बंद कराई गईं। इन क्षेत्र में विरोध शांतिपूर्ण ढंग से किया गया। इस मामले का बुधवार को फैसला आने के मद्देनजर शहर पुलिस आयुक्त प्रवीण दीक्षित ने अदालत परिसर में पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त लगा दिया था। बुधवार को सुबह से ही शहर के सभी चौराहों, संवेदनशील इलाकों में पुलिस दल को पेट्रोलिंग पर लगा दिया गया था। पुलिस गश्तीदल, कमांडो सभी स्थानों पर पूरी मुस्तैदी से नजर रखे हुए थे।
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1 टिप्पणी:

dilip kumar janjal ने कहा…

achhi jankari aapke blog dwara mili dhanywaad............